उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी (सपा) को गठबंधन का खुला प्रस्ताव देने के बाद सपा ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस बयान को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। Owaisi Alliance Offer
मुरादाबाद से दिया था गठबंधन का संदेश
मुरादाबाद दौरे के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में दोबारा भाजपा की सरकार बने।
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए समाजवादी पार्टी नेतृत्व से गठबंधन पर बातचीत की अपील करते हुए कहा कि अभी भी समय है और चुनाव के बाद पछताने से बेहतर है कि पहले ही बातचीत कर ली जाए।
सपा ने नीयत पर उठाए सवाल
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि ओवैसी की राजनीतिक लड़ाई भाजपा से नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि ओवैसी लगातार सपा पर हमला करते रहे हैं। ऐसे में अब गठबंधन की बात करना उनकी मंशा पर सवाल खड़ा करता है। सपा का यह भी कहना है कि ओवैसी की राजनीति विपक्षी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकती है।
भाजपा ने भी साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी ने भी ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्षी दल आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से फिलहाल ओवैसी के प्रस्ताव को स्वीकार करने के कोई संकेत नहीं दिए गए हैं।
आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के रुख और संभावित चुनावी रणनीतियों पर सभी की नजर रहेगी।











