उज्जैन। रामघाट पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की दैनिक आरती को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। 11 साल से आरती करा रहे तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति के बीच आरती की व्यवस्था को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। शुक्रवार शाम आरती के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और घाट पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। अब पंडा समिति ने विरोध में शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।
शिप्रा आरती की व्यवस्था को लेकर विवाद
प्रशासन की ओर से शिप्रा आरती को भव्य स्वरूप देने के लिए इसकी व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति को सौंपने का फैसला लिया गया है। बताया जा रहा है कि इसे हरिद्वार की तर्ज पर बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। वहीं, पिछले 11 साल से आरती करा रहे तीर्थ पुरोहित इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। पंडा समिति का कहना है कि नई व्यवस्था के जरिए उन्हें वर्षों पुरानी परंपरा से दूर करने की कोशिश की जा रही है।
आरती के दौरान आमने-सामने आए दोनों पक्ष
शुक्रवार शाम रामघाट पर शिप्रा आरती के दौरान विवाद उस समय बढ़ गया, जब पंडा-पुरोहित और मंदिर समिति की व्यवस्था को लेकर आमने-सामने आ गए। इस दौरान घाट पर धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची। बताया गया कि पंडा-पुरोहितों के विरोध और घाट से नहीं हटने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और उन्हें वहां से हटाया।
मंदिर समिति ही संभालेगी आरती की व्यवस्था
विवाद के बीच प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शिप्रा नदी की दैनिक आरती की व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति ही संभालेगी। प्रशासन का कहना है कि आरती को भव्य रूप देने और बेहतर व्यवस्था के लिए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस फैसले के बाद पंडा-पुरोहितों में नाराजगी बनी हुई है।
विरोध में शिप्रा नदी में उतरे पंडा-पुरोहित
आरती की व्यवस्था को लेकर विरोध कर रही पंडा समिति ने अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए शनिवार को शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। पंडा-पुरोहितों का कहना है कि वे 11 साल से चली आ रही परंपरा को खत्म नहीं होने देंगे।
रामघाट पर आरती की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासन और पंडा-पुरोहितों के बीच बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है, इस पर सभी की नजर है।











