Delhi Farmers Protest: कृषि से जुड़े मुद्दों और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत आयोजित करेंगे। ‘देश बचाओ मोर्चा’ के आह्वान पर बुलाई गई इस महापंचायत में आयोजकों ने देशभर के 550 से अधिक किसान संगठनों और सामाजिक मंचों के शामिल होने का दावा किया है।
किसान संगठनों का कहना है कि इस महापंचायत में कृषि और किसानों से जुड़े प्रमुख मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
महापंचायत में किसान संगठन कई मांगों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। इनमें शामिल हैं—
- अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग।
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी।
- किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग।
किसान संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से छोटे किसानों, कृषि मजदूरों और डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
गुरनाम सिंह चढूनी हिरासत में
महापंचायत से पहले हरियाणा पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी और उनके कुछ साथियों को कुरुक्षेत्र के पेहोवा से हिरासत में लिया।
इस कार्रवाई के विरोध में किसानों ने हरियाणा के यमुनानगर, अंबाला और सोनीपत के कुछ टोल प्लाजा और राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रदर्शन किया। किसानों ने अपने नेताओं की रिहाई की मांग भी उठाई।
दिल्ली कूच के लिए कई राज्यों से रवाना हुए किसान
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से किसान दिल्ली के लिए रवाना होने का दावा कर रहे हैं। वहीं हरियाणा में कई किसान नेताओं को नजरबंद किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
दिल्ली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों और सीमाओं पर पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई
पंजाब से आने वाले किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग कर सुरक्षा बढ़ा दी है। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
किसान संगठनों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
प्रशासन और किसानों की नजर 21 जुलाई पर
महापंचायत और दिल्ली कूच को लेकर प्रशासन और किसान संगठन दोनों अपने-अपने स्तर पर तैयारियां कर रहे हैं। अब सभी की नजर 21 जुलाई को होने वाली किसान महापंचायत और उससे जुड़े घटनाक्रम पर टिकी है।











