रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा ग्राहक को नई E20 कम्पैटिबल कार देने या करीब 20.50 लाख रुपये लौटाने के आदेश के बाद मारुति सुज़ुकी ने आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि वह इस आदेश को उच्च मंच पर चुनौती देगी।
कंपनी का दावा है कि विवादित ग्रैंड विटारा पूरी तरह E20 ईंधन के अनुरूप थी और इसकी जानकारी ओनर मैनुअल में भी दी गई थी।
कंपनी ने फैसले पर जताई आपत्ति
मारुति सुज़ुकी ने कहा कि जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
कंपनी के अनुसार, जांच के दौरान वाहन से लिए गए ईंधन के नमूने में मिलावट के संकेत मिले थे। ऐसे में वाहन को ही खराबी का कारण मानना सही नहीं है।

E20 कम्पैटिबल होने का दावा
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि संबंधित वाहन E20 पेट्रोल पर चलने के लिए डिजाइन किया गया था। इसके तकनीकी दस्तावेज और ओनर मैनुअल में भी यह स्पष्ट रूप से दर्ज है।
मारुति का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य वाहन की बजाय ईंधन की गुणवत्ता की ओर इशारा करते हैं।
उच्च मंच पर जाएगी कंपनी
मारुति सुज़ुकी ने साफ किया है कि वह जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ सक्षम उच्च मंच पर अपील करेगी। कंपनी ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी जरूरी कदम उठाएगी।
क्या है पूरा मामला?
रायपुर के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता ने वर्ष 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा खरीदी थी। कुछ समय बाद कार में बार-बार तकनीकी खराबी आने की शिकायत के बाद मामला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।
आयोग ने अपने आदेश में माना कि ग्राहक को दी गई कार E20 ईंधन के अनुरूप नहीं थी। इसके बाद कंपनी और अधिकृत डीलर को 45 दिनों के भीतर नई E20 कम्पैटिबल कार देने या करीब 20.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक प्रताड़ना, वाद व्यय और ब्याज देने के भी निर्देश दिए।

अब आगे क्या होगा?
मारुति सुज़ुकी की अपील के बाद मामला अब उच्च उपभोक्ता आयोग या अन्य सक्षम न्यायिक मंच पर जाएगा। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश और कंपनी के दावों पर कानूनी सुनवाई होगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अंतिम फैसला उच्च मंच पर होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।











