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Sawan Ka Pahla Somvar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें व्रत के नियम, बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका और शुभ तिथियां

Sawan Ka Pahla Somvar 2026: भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का पहला सोमवार आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा ...

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Sawan Ka Pahla Somvar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें व्रत के नियम, बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका और शुभ तिथियां

Sawan Ka Pahla Somvar 2026: भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का पहला सोमवार आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

शिव पूजा में बेलपत्र (बिल्व पत्र) का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि इसे चढ़ाने और तोड़ने के भी कुछ धार्मिक नियम बताए गए हैं।

बेलपत्र कब नहीं तोड़ना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निम्न तिथियों पर बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए—

  • चतुर्थी
  • अष्टमी
  • नवमी
  • चतुर्दशी
  • अमावस्या
  • संक्रांति काल
  • सोमवार

बेलपत्र तोड़ते समय भगवान शिव का स्मरण करते हुए श्रद्धा के साथ उन्हें प्रणाम करना चाहिए।

भगवान शिव को बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?

  • बेलपत्र कभी भी टहनी सहित नहीं तोड़ना चाहिए।
  • तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सबसे शुभ माना जाता है।
  • बेलपत्र की डंठल हटाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें।
  • बेलपत्र अनामिका, मध्यमा और अंगूठे की सहायता से अर्पित करें।
  • बेलपत्र चढ़ाने के बाद जल से अभिषेक अवश्य करें।
  • कटा-फटा या क्षतिग्रस्त बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।

क्या पहले चढ़ाया गया बेलपत्र दोबारा चढ़ा सकते हैं?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बेलपत्र कभी बासी नहीं माना जाता। यदि नया बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पहले चढ़ाए गए बेलपत्र को स्वच्छ जल से धोकर दोबारा भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है।

सावन में शिव पूजा की सरल विधि

  • शिवलिंग पर जल और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • चंदन का तिलक लगाएं।
  • बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें।
  • बेलपत्र अर्पित करने के बाद पुनः जल चढ़ाएं।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • केसर की खीर या अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।

बेलपत्र का धार्मिक महत्व

  • तीन पत्तियां भगवान शिव के त्रिनेत्र का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • यह भगवान शिव के त्रिशूल का भी प्रतीक है।
  • बेलपत्र शीतलता का प्रतीक माना जाता है।
  • सावन में बेलपत्र अर्पित करने से आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता है।
  • बेल वृक्ष के नीचे शिव पूजा करने को मोक्षदायक माना गया है।
  • बिल्व वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।

2026 में सावन कब से कब तक है?

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक रहेगा।

2026 में सावन के पांच सोमवार

  • पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • पांचवां सोमवार: 31 अगस्त 2026

सावन शिवरात्रि कब है?

वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त (मंगलवार) को मनाई जाएगी। इस दिन शिवभक्त और कांवड़िए भगवान शिव का विशेष जलाभिषेक करेंगे।

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