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अयोध्या में कांग्रेस के कार्यक्रम में मछली परोसने का दावा, सनातन रक्षक संघ ने उठाए सवाल

अयोध्या। सावन के महीने में अयोध्या में कांग्रेस के एक कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के ...

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अयोध्या में कांग्रेस के कार्यक्रम में मछली परोसने का दावा, सनातन रक्षक संघ ने उठाए सवाल

अयोध्या। सावन के महीने में अयोध्या में कांग्रेस के एक कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या दौरे के दौरान तारुन रोड स्थित अर्पित लॉन में स्वागत कार्यक्रम रखा गया था। इसी कार्यक्रम को लेकर सनातन रक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि कार्यकर्ताओं के लिए मछली भोज की तैयारी की जा रही थी।

दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम में बड़ी मात्रा में मछली तैयार की जा रही थी। हालांकि, 2 क्विंटल से ज्यादा मछली बनाए जाने की बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर लॉन में करीब 25 किलो मछली तैयार होने की बात सामने आई है।

हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद स्वागत कार्यक्रम

जानकारी के मुताबिक अजय राय अयोध्या दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने सुबह हनुमानगढ़ी में दर्शन किए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद तारुन रोड स्थित अर्पित लॉन में उनके स्वागत का कार्यक्रम रखा गया। इसी दौरान कार्यक्रम में मछली बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। सावन के महीने में अयोध्या जैसे धार्मिक शहर में मछली भोज के दावे को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सनातन रक्षक संघ ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वीडियो सामने आने के बाद सनातन रक्षक संघ के अध्यक्ष मुकुंद माधव त्रिपाठी ने कांग्रेस और अजय राय पर निशाना साधा। उन्होंने सावन के दौरान मछली परोसे जाने के आरोप को लेकर कांग्रेस के धार्मिक रुख पर सवाल उठाए। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का एक तरफ राम मंदिर और धार्मिक आस्था की बात करना और दूसरी तरफ सावन में मछली भोज कराना दोहरे रवैये को दिखाता है। उन्होंने इसी को लेकर कांग्रेस पर ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ वाली राजनीति करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं

मछली भोज को लेकर लगाए गए आरोपों पर फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं कार्यक्रम में वास्तव में कितनी मछली तैयार की गई और उसे किस उद्देश्य से बनाया गया था, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल वीडियो सामने आने के बाद सावन के महीने में अयोध्या में हुए इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और मामला स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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