मध्य प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के लिए अच्छी खबर आई है। जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को जून 2019 से जून 2023 तक के 48 महीने का बकाया एरियर्स (Arrears) देने का आदेश बरकरार रखा है। इस फैसले से प्रदेश की हजारों महिला कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा।
करीब 1400 करोड़ रुपये का होगा भुगतान
हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, राज्य सरकार को करीब 1400 करोड़ रुपये का बकाया एरियर्स और ग्रेच्युटी का लाभ देना होगा। हालांकि, कोर्ट ने एरियर्स पर 6 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश रद्द कर दिया है। इससे राज्य सरकार को लगभग 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि नहीं चुकानी पड़ेगी।
ब्याज देने का आदेश क्यों हुआ रद्द?
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार को 120 दिनों के भीतर एरियर्स के साथ 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया था।
लेकिन डिवीजन बेंच ने कहा कि मूल याचिका में ब्याज की मांग का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। इसलिए ब्याज देने का आदेश कानून के अनुसार सही नहीं माना जा सकता। इसी वजह से ब्याज से जुड़ा आदेश रद्द कर दिया गया।
कोर्ट ने सरकार से पूछा अहम सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब केंद्र सरकार ने अपना अंशदान बढ़ाया, तो राज्य सरकार ने अपना हिस्सा कम क्यों कर दिया? कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मिलने वाला वास्तविक लाभ कम हो गया।
साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को पहले की तरह अपना अंशदान बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
साल 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 1,500 रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद कार्यकर्ताओं का मानदेय 10,000 रुपये और सहायिकाओं का 7,000 रुपये तक पहुंच गया था।
लेकिन 2019 में राज्य सरकार बदलने के बाद प्रदेश सरकार ने अपना अंशदान कम कर दिया। इसका असर कर्मचारियों के मानदेय पर पड़ा और उन्हें मिलने वाली राशि घट गई। इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
आंगनवाड़ी कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?
हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब प्रदेश की हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को 48 महीने का बकाया एरियर्स मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, उन्हें इस राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज नहीं मिलेगा। अब सभी की नजर राज्य सरकार द्वारा भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने पर रहेगी।












