गूगल न्यूज़ में हमारे साथ जुड़ें

FCRA Bill 2026: कांग्रेस ने बिल को बताया ‘ईसाई विरोधी’, वेणुगोपाल बोले- सरकार का सपना पूरा नहीं होने देंगे

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन को लेकर सियासत तेज हो गई है। चर्चा ...

Published

Published

FCRA Bill 2026: कांग्रेस ने बिल को बताया ‘ईसाई विरोधी’, वेणुगोपाल बोले- सरकार का सपना पूरा नहीं होने देंगे

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन को लेकर सियासत तेज हो गई है। चर्चा है कि केंद्र सरकार इस सत्र में FCRA संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है। कांग्रेस ने अभी से इसका विरोध शुरू कर दिया है। पार्टी ने प्रस्तावित बिल को ‘ईसाई विरोधी’ बताते हुए कहा है कि इससे देश में काम कर रहे अल्पसंख्यक संगठनों पर असर पड़ सकता है।

कांग्रेस ने बिल के प्रावधानों पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि FCRA के प्रस्तावित नियमों से ग्रामीण, आदिवासी और दूर-दराज के इलाकों में काम कर रहे ईसाई संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों को परेशानी हो सकती है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने आरोप लगाया कि देश के कई ऐसे इलाकों में ईसाई संगठन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन नए प्रावधानों के जरिए सरकार इन संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि प्रस्तावित नियमों के तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) को नियमों के उल्लंघन की स्थिति में किसी संस्था की संपत्ति अपने कब्जे में लेने का अधिकार मिल सकता है। कांग्रेस ने इस प्रावधान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

वेणुगोपाल बोले- जल्दबाजी में बिल लाया तो विरोध होगा

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि अगर सरकार जल्दबाजी में अगले कुछ दिनों में यह बिल लाने की कोशिश करती है तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह सपना पूरा नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि बिल को संसद में लाने से पहले इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और इससे प्रभावित होने वाली संस्थाओं की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राजनीतिक मुद्दा बनने की तैयारी

FCRA संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। केरल और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में ईसाई आबादी बड़ी संख्या में है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी ईसाई समुदाय की मौजूदगी है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण मान रहा है।

समाजवादी पार्टी ने भी सांसदों को जारी किया पत्र

FCRA बिल को लेकर समाजवादी पार्टी भी विरोध के मूड में है। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों को पत्र जारी कर 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यदि केंद्र सरकार इन तारीखों के आसपास FCRA संशोधन बिल संसद में पेश करती है तो विपक्षी दल सदन में इसका विरोध कर सकते हैं।

क्या है FCRA?

Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA भारत में NGOs, चैरिटेबल ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला कानून है। विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए संबंधित संस्था को गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन कराना होता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत FCRA रजिस्ट्रेशन को समय-समय पर रिन्यू कराना पड़ता है। प्रस्तावित संशोधन में ऐसी संस्थाओं की विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों और बची हुई राशि के प्रबंधन को लेकर भी प्रावधान किए जाने की बात सामने आई है, जिनका लाइसेंस रद्द हो जाता है, सरेंडर कर दिया जाता है या समय पर रिन्यू नहीं होता। सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित बदलावों से विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे सरकार को संस्थाओं की संपत्तियों पर ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं।

बतौर पत्रकार जुड़िए अनोखी आवाज़ से

Apply Form